कैपिटल गेन टैक्स कैलकुलेटर
FY 2026-27 की बिक्री के लिए: इक्विटी लाभ पर शॉर्ट-टर्म 20% और ₹1.25 लाख से ऊपर लॉन्ग-टर्म 12.5% टैक्स; ज़्यादातर अन्य लॉन्ग-टर्म लाभ पर 12.5%।
निवासी व्यक्तियों के लिए अनुमान। सरचार्ज शामिल नहीं है (इक्विटी लाभ पर अधिकतम 15%)। टैक्स सलाह नहीं।
FY 2026-27 के लिए भारत में कैपिटल गेन टैक्स
जब आप शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी, सोना या अन्य संपत्ति ख़रीद मूल्य से ज़्यादा में बेचते हैं, तो लाभ कैपिटल गेन होता है। यह शॉर्ट-टर्म है या लॉन्ग-टर्म, यह इस पर निर्भर करता है कि आपने संपत्ति कितने समय रखी: लिस्टेड शेयर और इक्विटी फंड के लिए 12 महीने से ज़्यादा, ज़्यादातर अन्य संपत्तियों के लिए 24 महीने से ज़्यादा। लॉन्ग-टर्म लाभ पर 12.5% टैक्स लगता है, और हर साल इक्विटी लाभ के पहले ₹1.25 लाख टैक्स-फ़्री हैं। शॉर्ट-टर्म इक्विटी लाभ पर 20%, और ज़्यादातर अन्य शॉर्ट-टर्म लाभ पर आपकी स्लैब दर से टैक्स लगता है। बजट 2026 ने ये दरें नहीं बदलीं।
टैक्स कैसे निकाला जाता है
लॉन्ग-टर्म इक्विटी लाभ पर ₹1.25 लाख की सालाना छूट से ऊपर की राशि पर 12.5% टैक्स लगता है। शॉर्ट-टर्म इक्विटी लाभ पर 20%। अन्य लॉन्ग-टर्म लाभ पर 12.5%; 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी ज़मीन और इमारतों पर आप इसके बजाय कॉस्ट इन्फ़्लेशन इंडेक्स (CII) से लागत इंडेक्स करके 20% दे सकते हैं, जो भी कम हो। अप्रैल 2023 से ख़रीदे डेट फंड और अन्य शॉर्ट-टर्म लाभ आपकी आय में जुड़कर स्लैब दर से टैक्स होते हैं। टैक्स पर 4% सेस जुड़ता है।
ज़रूरी नियम
- ₹1.25 लाख की छूट हर वित्त वर्ष के लिए है और लिस्टेड शेयर और इक्विटी फंड के आपके सभी लॉन्ग-टर्म लाभ पर मिलाकर लागू होती है।
- नई टैक्स व्यवस्था का ₹12 लाख का रिबेट विशेष दरों पर टैक्स होने वाले कैपिटल गेन पर लागू नहीं होता, इसलिए बाक़ी आय टैक्स-फ़्री होने पर भी इन लाभ पर टैक्स लग सकता है।
- 1 फ़रवरी 2018 से पहले ख़रीदे शेयरों की लागत 31 जनवरी 2018 की कीमत मानी जा सकती है, जिससे उससे पहले का लाभ सुरक्षित रहता है।
- प्रॉपर्टी के लॉन्ग-टर्म लाभ को तय समय-सीमा में दूसरा घर ख़रीदकर, या ₹50 लाख तक निर्धारित बॉन्ड में लगाकर, छूट दिलाई जा सकती है।
- शॉर्ट-टर्म नुकसान किसी भी कैपिटल गेन से घटाया जा सकता है; लॉन्ग-टर्म नुकसान सिर्फ़ लॉन्ग-टर्म लाभ से। समय पर रिटर्न भरने पर बचा नुकसान 8 साल तक आगे ले जा सकते हैं।
- FY 2026-27 का कॉस्ट इन्फ़्लेशन इंडेक्स 384 है (FY 2025-26 में 376)। इंडेक्सेशन अब सिर्फ़ 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी ज़मीन और इमारतों पर लागू है।
उदाहरण: शेयर और एक फ़्लैट
- ₹5,00,000 में ख़रीदे शेयर 18 महीने बाद ₹8,00,000 में बेचे: ₹3,00,000 का लॉन्ग-टर्म लाभ
- हर साल इक्विटी लॉन्ग-टर्म लाभ के पहले ₹1,25,000 टैक्स-फ़्री हैं, ₹1,75,000 टैक्स-योग्य बचते हैं
- 12.5% पर टैक्स ₹21,875, और 4% सेस ₹875: कुल ₹22,750
- अगर 12 महीने के अंदर बेचते, तो पूरे ₹3,00,000 पर 20% टैक्स लगता: सेस सहित ₹62,400
- 2015 में ₹40,00,000 में ख़रीदा फ़्लैट 2026 में ₹90,00,000 में बेचा: इंडेक्सेशन के साथ 20% (सेस सहित ₹6,14,173) बिना इंडेक्सेशन 12.5% (₹6,50,000) से कम है
कैपिटल गेन टैक्स दरें एक नज़र में (FY 2026-27)
23 जुलाई 2024 या उसके बाद बेचने वाले निवासी व्यक्तियों के लिए।
| संपत्ति | कितने समय बाद लॉन्ग-टर्म | शॉर्ट-टर्म दर | लॉन्ग-टर्म दर |
|---|---|---|---|
| लिस्टेड शेयर और इक्विटी फंड | 12 महीने | 20% | ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% |
| अप्रैल 2023 से ख़रीदे डेट फंड | कभी नहीं | स्लैब दर | स्लैब दर |
| ज़मीन और इमारतें | 24 महीने | स्लैब दर | 12.5%, या 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी हो तो इंडेक्सेशन के साथ 20% |
| सोना, गहने, गोल्ड फंड | 24 महीने | स्लैब दर | 12.5% |
| अनलिस्टेड शेयर और अन्य संपत्ति | 24 महीने | स्लैब दर | 12.5% |
ऊपर से 4% सेस लगता है। इक्विटी लाभ पर सरचार्ज अधिकतम 15% है।