इनकम टैक्स कैलकुलेटर FY 2026-27

FY 2026-27 (अप्रैल 2026 से मार्च 2027 की आय) के लिए अपडेट, इस साल लागू स्लैब, ₹12 लाख रिबेट और स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ।

दोनों व्यवस्थाओं में छूट: नई में बेसिक + DA का 14% तक, पुरानी में 10%।

कटौतियाँ (सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था)

नई व्यवस्था इन्हें नहीं मानती। आयकर अधिनियम, 2025 ने धाराओं के नंबर बदले हैं; यहाँ जाने-पहचाने नाम इस्तेमाल किए गए हैं।

₹1,50,000 तक
खुद के लिए ₹25,000 (60+ हों तो ₹50,000), और इतना ही माता-पिता के लिए
₹50,000 तक
₹2,00,000 तक

New Regime

कम टैक्स
कुल टैक्स
₹97,500
प्रति माह₹8,125प्रभावी टैक्स दर6.5%टैक्स के बाद आय₹14,02,500

Old Regime

कुल टैक्स
₹1,87,200
प्रति माह₹15,600प्रभावी टैक्स दर12.5%टैक्स के बाद आय₹13,12,800
नई व्यवस्था आपके साल में ₹89,700 बचाती है
इस वेतन पर पुरानी व्यवस्था तभी फ़ायदेमंद है जब आपकी कटौतियाँ (स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा) ₹5,43,750 से ज़्यादा हों। आपकी कटौतियाँ ₹2,25,000 हैं।

आपका टैक्स कैसे निकाला गया

New RegimeOld Regime
कुल आय₹15,00,000₹15,00,000
Standard Deduction− ₹75,000− ₹50,000
अन्य कटौतियाँ₹0− ₹2,25,000
Taxable Income₹14,25,000₹12,25,000
स्लैब पर टैक्स₹93,750₹1,80,000
स्वास्थ्य और शिक्षा सेस (4%)₹3,750₹7,200
कुल टैक्स₹97,500₹1,87,200

नई व्यवस्था के स्लैब

आयदरआपका टैक्स
₹4,00,000 तकशून्य₹0
₹4,00,000 – ₹8,00,0005%₹20,000
₹8,00,000 – ₹12,00,00010%₹40,000
₹12,00,000 – ₹16,00,00015%₹33,750
₹16,00,000 – ₹20,00,00020%₹0
₹20,00,000 – ₹24,00,00025%₹0
₹24,00,000 से ऊपर30%₹0

पुरानी व्यवस्था के स्लैब

आयदरआपका टैक्स
₹2,50,000 तकशून्य₹0
₹2,50,000 – ₹5,00,0005%₹12,500
₹5,00,000 – ₹10,00,00020%₹1,00,000
₹10,00,000 से ऊपर30%₹67,500

शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन विशेष दरों पर टैक्स होता है और यहाँ शामिल नहीं है; उस पर रिबेट नहीं मिलता। यह अनुमान है, टैक्स सलाह नहीं।

FY 2026-27 के लिए भारत में इनकम टैक्स

FY 2026-27 (टैक्स वर्ष 2026-27) का इनकम टैक्स 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की आय पर लगता है। यह आयकर अधिनियम, 2025 के तहत पहला साल है, लेकिन बजट 2026 ने पिछले साल की दरें और सीमाएँ ही रखीं। आप नई व्यवस्था में टैक्स दे सकते हैं, जो डिफ़ॉल्ट है और जिसमें दरें कम हैं पर लगभग कोई कटौती नहीं, या पुरानी व्यवस्था में, जिसमें दरें ज़्यादा हैं पर 80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज वगैरह की छूट मिलती है। यह कैलकुलेटर दोनों में आपका टैक्स निकालकर बताता है कि आपके लिए कौन सस्ती है।

आपका टैक्स कैसे निकाला जाता है

टैक्स = स्लैब टैक्स − रिबेट − मार्जिनल रिलीफ़ + सरचार्ज + 4% सेस

कुल आय से स्टैंडर्ड डिडक्शन (नई व्यवस्था में ₹75,000, पुरानी में ₹50,000) और उस व्यवस्था में मिलने वाली कटौतियाँ घटाकर कर-योग्य आय निकलती है। कर-योग्य आय के हर स्लैब पर उसकी दर से टैक्स लगता है। अगर कर-योग्य आय रिबेट सीमा (नई में ₹12 लाख, पुरानी में ₹5 लाख) के भीतर है, तो रिबेट टैक्स खत्म कर देता है। ₹50 लाख से ऊपर सरचार्ज लगता है, और ऊपर से 4% स्वास्थ्य और शिक्षा सेस जुड़ता है।

FY 2026-27 के मुख्य नियम

  • नई व्यवस्था में ₹12,75,000 तक का वेतन टैक्स-फ़्री है: ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन से कर-योग्य आय ₹12,00,000 रह जाती है, और रिबेट उस पर टैक्स खत्म कर देता है।
  • ₹12,00,000 से थोड़ा ऊपर, मार्जिनल रिलीफ़ आपका टैक्स ₹12,00,000 से ऊपर की आय तक सीमित कर देता है, इसलिए थोड़ा ज़्यादा कमाने से आपको कभी नुकसान नहीं होता।
  • नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है। अगर आपकी कोई कारोबारी आय नहीं है, तो आप हर साल रिटर्न भरते समय कोई भी व्यवस्था चुन सकते हैं।
  • नई व्यवस्था में आम कटौतियों में सिर्फ़ स्टैंडर्ड डिडक्शन और नियोक्ता का NPS योगदान (बेसिक + DA का 14% तक) बचे हैं।
  • शेयर और इक्विटी फंड पर कैपिटल गेन पर रिबेट नहीं मिलता, उस पर अलग से टैक्स लगता है (शॉर्ट-टर्म 20%; ₹1.25 लाख से ऊपर लॉन्ग-टर्म 12.5%)।
  • ₹50 लाख से ऊपर (10%), ₹1 करोड़ से ऊपर (15%) और ₹2 करोड़ से ऊपर (25%) सरचार्ज लगता है। पुरानी व्यवस्था में ₹5 करोड़ से ऊपर 37% लगता है।
  • वरिष्ठ नागरिकों को ज़्यादा टैक्स-फ़्री सीमा सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में मिलती है: 60 की उम्र से ₹3 लाख और 80 से ₹5 लाख।

उदाहरण: ₹15 लाख वेतन

  1. नई व्यवस्था: वेतन ₹15,00,000 में से ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने पर ₹14,25,000 कर-योग्य आय बचती है
  2. स्लैब टैक्स: ₹4,00,000 तक शून्य, फिर ₹4,00,000 का 5% (₹20,000), ₹4,00,000 का 10% (₹40,000) और ₹2,25,000 का 15% (₹33,750)
  3. स्लैब पर टैक्स ₹93,750 है। कोई रिबेट नहीं, क्योंकि कर-योग्य आय ₹12,00,000 से ज़्यादा है
  4. 4% सेस (₹3,750) के साथ कुल ₹97,500 सालाना, यानी ₹8,125 महीना
  5. ₹2,25,000 की कटौतियों के साथ पुरानी व्यवस्था: कर-योग्य आय ₹12,25,000 और टैक्स ₹1,87,200। नई व्यवस्था ₹89,700 बचाती है

आम वेतन पर टैक्स, FY 2026-27

60 से कम उम्र के वेतनभोगी के लिए कुल टैक्स (सेस सहित), बिना अन्य आय के। पुरानी व्यवस्था वाले कॉलम में ₹2,25,000 की कटौतियाँ (80C, 80D और NPS) मानी गई हैं।

वेतननई व्यवस्थापुरानी व्यवस्थापुरानी को बराबर करने के लिए ज़रूरी कटौतियाँ
₹8,00,000₹0₹18,200₹2,50,000
₹10,00,000₹0₹59,800₹4,50,000
₹12,75,000₹0₹1,17,000₹7,25,000
₹15,00,000₹97,500₹1,87,200₹5,43,750
₹20,00,000₹1,92,400₹3,43,200₹7,08,334
₹25,00,000₹3,19,800₹4,99,200₹8,00,000
₹30,00,000₹4,75,800₹6,55,200₹8,00,000
₹50,00,000₹10,99,800₹12,79,200₹8,00,000

आख़िरी कॉलम बताता है कि पुरानी व्यवस्था का टैक्स नई के बराबर करने के लिए (स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा) कितनी कटौती चाहिए। लगभग ₹25 लाख से ऊपर यह ₹8 लाख है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज़्यादातर लोगों के लिए नई व्यवस्था। पुरानी तभी फ़ायदेमंद है जब कटौतियाँ बड़ी हों: ₹15 लाख वेतन पर आपको स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा लगभग ₹5.4 लाख से ज़्यादा कटौतियाँ चाहिए, और ₹25 लाख से ऊपर ₹8 लाख। ऊपर अपने आँकड़े डालकर दोनों की तुलना करें।
हाँ, नई व्यवस्था में। असल में ₹12,75,000 तक का वेतन टैक्स-फ़्री है, क्योंकि ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन से कर-योग्य आय ₹12,00,000 रह जाती है और धारा 87A का रिबेट (₹60,000 तक) टैक्स खत्म कर देता है। ब्याज जैसी अन्य आय भी ₹12 लाख की सीमा में गिनी जाती है।
मुख्य रूप से वेतन या पेंशन पर ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और नियोक्ता का NPS योगदान। 80C, 80D, HRA, LTA और खुद रहने वाले घर के होम लोन ब्याज की छूट नहीं मिलती।
अगर आपकी कोई कारोबारी आय नहीं है, तो हाँ: आप हर साल रिटर्न भरते समय चुनते हैं। अगर कारोबार या पेशे से आय है, तो पुरानी से नई व्यवस्था में सिर्फ़ एक बार लौट सकते हैं।
नहीं। शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लाभ विशेष दरों पर टैक्स होता है (शॉर्ट-टर्म 20%, ₹1.25 लाख से ऊपर लॉन्ग-टर्म 12.5%) और उस पर रिबेट नहीं मिलता, इसलिए वह टैक्स अलग से जोड़ें।