HRA छूट कैलकुलेटर

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे या अहमदाबाद (FY 2026-27 से)
गणना के लिए आंकड़े डालें

HRA छूट के बारे में

HRA छूट उन वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलती है जो किराया देते हैं और पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं। अपने HRA का कितना हिस्सा टैक्स-फ़्री है, यह देखने के लिए सालाना आंकड़े डालें।

इनपुट की जानकारी

  • बेसिक सैलरी: सालाना बेसिक वेतन और महंगाई भत्ता (DA)।
  • मिला HRA: एम्प्लॉयर से साल भर में मिला कुल HRA।
  • चुकाया किराया: साल भर में चुकाया गया कुल किराया।
  • मेट्रो शहर: अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे या अहमदाबाद में रहते हैं तो टिक करें (आख़िरी चार FY 2026-27 से)।

कैसे इस्तेमाल करें

  1. अपनी सालाना बेसिक सैलरी और मिला HRA डालें।
  2. साल भर में चुकाया गया कुल किराया डालें।
  3. बताएँ कि आप मेट्रो शहर में रहते हैं या नहीं।
  4. छूट वाला और टैक्सेबल HRA देखें।

गणना का तरीका

छूट इन तीनों में से सबसे कम रकम होती है:

  • वास्तव में मिला HRA।
  • सैलरी का 50% (मेट्रो) या 40% (अन्य शहर)।
  • चुकाया किराया घटा बेसिक सैलरी का 10%।

HRA छूट क्या है?

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) आपकी सैलरी का वह हिस्सा है जो नियोक्ता किराए में मदद के लिए देता है। अगर आप किराए के घर में रहते हैं और पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो इसका कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा इनकम टैक्स से छूट पा सकता है। छूट की राशि केवल आपका किराया नहीं होती; यह तीन सीमाओं में से सबसे कम होती है, इसलिए समान किराया देने वाले दो लोगों की छूट बहुत अलग हो सकती है। नई टैक्स व्यवस्था में HRA पूरी तरह टैक्सेबल है।

HRA छूट का फ़ॉर्मूला

छूट वाला HRA = इनमें सबसे कम (मिला हुआ HRA, सैलरी का 50% या 40%, किराया − सैलरी का 10%)

यहाँ 'सैलरी' का मतलब बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA, जहाँ वह रिटायरमेंट लाभों में गिना जाता है) तथा टर्नओवर के प्रतिशत के रूप में तय कमीशन है, आपकी कुल सैलरी नहीं। आठ मेट्रो शहरों में रहने पर 50% की सीमा लागू होती है; बाकी जगह 40%। जो HRA छूट में नहीं आता, वह टैक्सेबल सैलरी में जुड़ जाता है। केवल उन्हीं महीनों के आँकड़े लें जब आप सच में किराए के घर में रहे।

जानने योग्य नियम

  • वित्त वर्ष 2026-27 से मेट्रो शहर (50% सीमा): दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद। बाकी सभी शहरों में 40%।
  • HRA छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है।
  • अगर सालाना किराया ₹1 लाख से अधिक है, तो नियोक्ता को मकान मालिक का PAN देना होता है।
  • किराए की रसीदें और रेंट एग्रीमेंट संभालकर रखें। नियोक्ता इन्हें माँग सकता है, और जाँच के दौरान टैक्स विभाग भी।
  • अगर घर माता-पिता का है और व्यवस्था वास्तविक है, तो आप उन्हें किराया दे सकते हैं; उन्हें यह किराया अपनी आय में दिखाना होगा।
  • जीवनसाथी को दिया गया किराया आम तौर पर मान्य नहीं होता, और अपने खुद के घर में रहने पर HRA का दावा नहीं किया जा सकता।

उदाहरण: बेंगलुरु में किराए पर

  1. सालाना बेसिक + DA: ₹6,00,000। मिला हुआ HRA: ₹3,00,000। किराया: ₹30,000 महीना (₹3,60,000 सालाना), बेंगलुरु में
  2. सीमा 1, मिला हुआ HRA: ₹3,00,000
  3. सीमा 2, सैलरी का 50% (वित्त वर्ष 2026-27 से बेंगलुरु मेट्रो में गिना जाता है): ₹3,00,000
  4. सीमा 3, किराया − सैलरी का 10%: ₹3,60,000 − ₹60,000 = ₹3,00,000
  5. छूट वाला HRA तीनों में सबसे कम, ₹3,00,000 है, इसलिए कोई भी HRA टैक्सेबल नहीं है
  6. वित्त वर्ष 2026-27 से पहले बेंगलुरु पर 40% की सीमा लागू थी: तब केवल ₹2,40,000 छूट में आते और ₹60,000 टैक्सेबल होते

मासिक किराए के अनुसार HRA छूट

₹6,00,000 सालाना बेसिक + DA और ₹3,00,000 HRA वाले कर्मचारी के लिए।

मासिक किरायाछूट वाला HRA (मेट्रो)छूट वाला HRA (गैर-मेट्रो)
₹10,000₹60,000₹60,000
₹15,000₹1,20,000₹1,20,000
₹20,000₹1,80,000₹1,80,000
₹25,000₹2,40,000₹2,40,000
₹30,000₹3,00,000₹2,40,000
₹40,000₹3,00,000₹2,40,000

सैलरी के 10% (यहाँ ₹5,000 महीना) तक के किराए पर कोई छूट नहीं मिलती। ज़्यादा किराए पर छूट मिले हुए HRA या शहर की सीमा, जो भी कम हो, तक सीमित रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नहीं। HRA छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने पर मिलती है। नई व्यवस्था में पूरा HRA टैक्सेबल है, इसलिए दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करते समय इसे ध्यान में रखें।
वित्त वर्ष 2026-27 से आठ शहरों पर 50% की सीमा लागू है: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद आयकर नियम, 2026 से जोड़े गए। बाकी सभी शहरों पर 40% की सीमा है।
पुरानी व्यवस्था में, जो लोग किराया देते हैं पर HRA नहीं पाते, वे किराए पर अलग कटौती का दावा कर सकते हैं, जो ₹5,000 महीने तक सीमित है और अन्य शर्तों के अधीन है, जैसे जिस शहर में रहते हैं वहाँ अपना घर न होना।
हाँ, अगर स्थिति वास्तविक है। जैसे, आपका घर किसी दूसरे शहर में या कार्यस्थल से दूर है और आप ऑफ़िस के पास किराए पर रहते हैं। किराए की व्यवस्था के सबूत रखें।
केवल उन महीनों के लिए जब आप किराए के घर में रहे और HRA पाया। अगर आप अक्टूबर में किराए के फ़्लैट में आए, तो छह महीने की सैलरी, HRA और किराए से छूट की गणना करें।