इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर

अपना CTC और सैलरी स्ट्रक्चर डालें और देखें कि नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में हर महीने आपके बैंक खाते में कितना आता है।

ऑफ़र लेटर में लिखी कुल कॉस्ट टू कंपनी
आमतौर पर 40–50%। लेबर कोड के तहत बेसिक + DA आपके वेतन का कम से कम आधा होना चाहिए।
अक्सर 40%, मेट्रो शहरों में 50%
CTC का हिस्सा, मासिक वेतन से अलग मिलता है
कौन-सा लागू है, यह ऑफ़र लेटर या HR से पता करें
बेसिक का 4.81%; पाँच साल बाद नौकरी छोड़ने पर मिलती है
नई व्यवस्था में 14% तक टैक्स-फ़्री (पुरानी में 10%)
ज़्यादातर राज्यों में ₹2,500 तक; दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ₹0
पुरानी व्यवस्था की छूट (वैकल्पिक)

केवल पुरानी व्यवस्था के लिए। आपका PF पहले से 80C में गिना जाता है।

PPF, ELSS, जीवन बीमा, ट्यूशन फ़ीस। ₹1,50,000 की 80C सीमा में आपका PF शामिल है।
हर महीने इन-हैंड सैलरी
₹85,387

नई व्यवस्था में आपको साल में ₹1,11,725 ज़्यादा मिलते हैं।

प्रति माहनई व्यवस्थापुरानी व्यवस्था
ग्रॉस सैलरी (वेरिएबल पे के बिना)₹91,595₹91,595
आपका PF योगदान-₹6,000-₹6,000
प्रोफेशनल टैक्स-₹208-₹208
इनकम टैक्स (TDS)₹0-₹9,310
इन-हैंड सैलरी₹85,387₹76,076
साल भर का टेक-होम₹10,24,640₹9,12,915
साल का इनकम टैक्स₹0₹1,11,725

आपका CTC ब्रेकअप

घटकसालानामासिक
बेसिक + DA₹6,00,000₹50,000
HRA₹2,40,000₹20,000
स्पेशल अलाउंस₹2,59,140₹21,595
एम्प्लॉयर PF₹72,000₹6,000
ग्रेच्युटी₹28,860₹2,405
CTC₹12,00,000₹1,00,000

एम्प्लॉयर PF, एम्प्लॉयर NPS और ग्रेच्युटी आपके CTC का हिस्सा हैं, लेकिन हर महीने नहीं मिलते: PF और NPS आपके रिटायरमेंट खातों में जाते हैं, और ग्रेच्युटी पाँच साल बाद नौकरी छोड़ने पर मिलती है।

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CTC, ग्रॉस सैलरी और इन-हैंड सैलरी

आपका CTC (कॉस्ट टू कंपनी) वह सब कुछ है जो आपका एम्प्लॉयर साल भर में आप पर ख़र्च करता है। इसका एक हिस्सा हर महीने आपके बैंक खाते तक नहीं पहुँचता: एम्प्लॉयर का PF योगदान, ग्रेच्युटी और एम्प्लॉयर NPS रिटायरमेंट बचत में जाते हैं, और वेरिएबल पे या बोनस अलग से मिलता है। जो बचता है वह आपकी ग्रॉस सैलरी है। उसमें से आपका PF, प्रोफेशनल टैक्स और इनकम टैक्स (TDS) कटता है, और बाकी आपकी इन-हैंड सैलरी है।

इन-हैंड सैलरी कैसे निकाली जाती है

इन-हैंड = (ग्रॉस सैलरी − वेरिएबल पे − आपका PF − प्रोफेशनल टैक्स − इनकम टैक्स) ÷ 12

ग्रॉस सैलरी = CTC − एम्प्लॉयर PF − ग्रेच्युटी − एम्प्लॉयर NPS। PF बेसिक का 12% है (या ₹25,000 प्रति माह तक के बेसिक का, अगर एम्प्लॉयर सीमा लगाता है), और ग्रेच्युटी बेसिक का 4.81% है। इनकम टैक्स हर व्यवस्था में ग्रॉस सैलरी पर निकाला जाता है: नई व्यवस्था में ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है और ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स नहीं लगता; पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और 80C, 80D, HRA और प्रोफेशनल टैक्स की छूट मिलती है।

आपकी इन-हैंड सैलरी को क्या बदलता है

  • 17 सितंबर 2026 को EPF वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 प्रति माह हो गई। जो एम्प्लॉयर PF पर सीमा लगाते हैं वे अब आपसे ₹3,000 प्रति माह तक काटते हैं (और ₹3,000 जोड़ते हैं); बाकी आपके पूरे बेसिक का 12% काटते हैं।
  • लेबर कोड के तहत बेसिक और DA मिलाकर आपके वेतन का कम से कम आधा होना चाहिए। बेसिक ज़्यादा होने से PF और ग्रेच्युटी बढ़ती है, इसलिए CTC वही रहने पर भी इन-हैंड सैलरी थोड़ी घट सकती है।
  • नई व्यवस्था में बेसिक के 14% तक का एम्प्लॉयर NPS योगदान टैक्स-फ़्री है, इसलिए CTC का कुछ हिस्सा NPS में डालकर टैक्स घटाया जा सकता है।
  • बोनस आपकी आय को ₹12 लाख से ऊपर ले जाकर पूरी रकम पर टैक्स लगवा सकता है, इसलिए टैक्स के बाद बोनस उम्मीद से काफ़ी कम हो सकता है।
  • प्रोफेशनल टैक्स राज्य का टैक्स है, साल में ₹2,500 तक। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में यह नहीं लगता।
  • ग्रेच्युटी आमतौर पर पाँच साल या उससे ज़्यादा नौकरी करने पर ही मिलती है, इसलिए कई ऑफ़र लेटर इसे CTC में गिनते हैं, भले ही यह आपको कभी न मिले।
  • एम्प्लॉयर साल की शुरुआत में आपकी चुनी व्यवस्था के हिसाब से TDS काटता है, लेकिन रिटर्न भरते समय आप दूसरी व्यवस्था चुन सकते हैं।

उदाहरण: ₹12 लाख CTC

  1. ₹12,00,000 का CTC, बेसिक 50% (₹6,00,000) और HRA बेसिक का 40% (₹2,40,000)
  2. एम्प्लॉयर PF बेसिक का 12% यानी ₹72,000 और ग्रेच्युटी बेसिक का 4.81% यानी ₹28,860 है। दोनों को CTC से घटाने पर ग्रॉस सैलरी ₹10,99,140 बचती है
  3. आपका अपना PF योगदान भी ₹72,000 है, और प्रोफेशनल टैक्स ₹2,500
  4. नई व्यवस्था: ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹10,24,140 है। यह ₹12,00,000 से कम है, इसलिए रिबेट से टैक्स शून्य हो जाता है
  5. इन-हैंड सैलरी: (₹10,99,140 − ₹72,000 − ₹2,500) ÷ 12 = ₹85,387 प्रति माह
  6. पुरानी व्यवस्था, 80C में केवल आपके PF के साथ: साल का टैक्स ₹1,11,725, यानी ₹76,076 प्रति माह

CTC के हिसाब से इन-हैंड सैलरी

बेसिक CTC का 50%, HRA बेसिक का 40%, पूरे बेसिक पर PF, ग्रेच्युटी CTC में, ₹2,500 प्रोफेशनल टैक्स और कोई वेरिएबल पे नहीं। पुरानी व्यवस्था में 80C में केवल आपका PF गिना गया है।

सालाना CTCमासिक इन-हैंड (नई व्यवस्था)मासिक इन-हैंड (पुरानी व्यवस्था)सालाना इनकम टैक्स (नई व्यवस्था)
₹6,00,000₹42,589₹42,589₹0
₹10,00,000₹71,121₹64,778₹0
₹12,00,000₹85,387₹76,076₹0
₹15,00,000₹1,00,299₹91,018₹77,832
₹20,00,000₹1,29,330₹1,15,556₹1,57,435
₹30,00,000₹1,80,685₹1,63,850₹3,97,129
₹50,00,000₹2,75,714₹2,58,879₹9,68,682

आपके ऑफ़र लेटर का स्ट्रक्चर इन आंकड़ों को बदलता है; अपने आंकड़ों के लिए ऊपर उसे भरें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नई व्यवस्था में लगभग ₹85,400 प्रति माह, अगर बेसिक CTC का 50% है, PF पूरे बेसिक का 12% है और ग्रेच्युटी CTC में शामिल है। कोई इनकम टैक्स नहीं लगता क्योंकि टैक्सेबल आय ₹12 लाख से कम रहती है। अगर एम्प्लॉयर PF को ₹25,000 की वेतन सीमा पर रोकता है, तो इन-हैंड लगभग ₹91,400 हो जाती है।
क्योंकि CTC में वह पैसा भी शामिल है जो हर महीने नहीं मिलता: एम्प्लॉयर का PF, ग्रेच्युटी, एम्प्लॉयर NPS और वेरिएबल पे। फिर बचे हुए में से आपका PF, प्रोफेशनल टैक्स और इनकम टैक्स कटता है। इन-हैंड आमतौर पर CTC ÷ 12 का 65–85% होती है।
ग्रॉस सैलरी कटौतियों से पहले एम्प्लॉयर का दिया वेतन है: बेसिक, HRA, स्पेशल अलाउंस और अन्य भत्ते। नेट (इन-हैंड) सैलरी ग्रॉस सैलरी में से आपका PF, प्रोफेशनल टैक्स और इनकम टैक्स घटाकर बचती है।
ज़्यादातर सैलरी के लिए नई व्यवस्था बेहतर है, ख़ासकर लगभग ₹15 लाख तक, क्योंकि ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय टैक्स-फ़्री है। अगर आपकी छूट बड़ी हैं, जैसे ज़्यादा किराए पर HRA, होम लोन और पूरा 80C और 80D, तो पुरानी व्यवस्था बेहतर हो सकती है। तुलना के लिए ऊपर अपना किराया और निवेश भरें।
थोड़ी घट सकती है। कोड के तहत बेसिक और DA मिलाकर वेतन का कम से कम आधा होना चाहिए। अगर आपका बेसिक कम था, तो वह बढ़ेगा, जिससे PF कटौती और ग्रेच्युटी बढ़ेगी। CTC वही रहता है, लेकिन उसका ज़्यादा हिस्सा मासिक वेतन की जगह PF और ग्रेच्युटी में जाता है।
सीमा के भीतर नहीं। बेसिक के 12% तक का एम्प्लॉयर योगदान टैक्स-फ़्री है, लेकिन अगर PF, NPS और सुपरएनुएशन में एम्प्लॉयर का कुल योगदान साल में ₹7.5 लाख से ज़्यादा हो, तो अतिरिक्त रकम टैक्सेबल है। आपके अपने PF योगदान पर साल में ₹2.5 लाख से ऊपर के हिस्से का ब्याज भी टैक्सेबल है।